Walking Catfish (Clarias batrachus) से सावधान — क्या इससे कैंसर हो सकता है?
( Apurba Das )
भारतीय बाज़ारों में मिलने वाली Walking Catfish, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Clarias batrachus कहा जाता है और आम बोलचाल में मैगुर मछली / Thai Magur / विदेशी मैगुर भी कहा जाता है, पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय बनी हुई है। इसका कारण इसके पोषक गुण नहीं, बल्कि इससे जुड़ी स्वास्थ्य चिंताएँ, जल संसाधनों को होने वाले नुकसान, और संभावित स्वास्थ्य जोखिम हैं। अक्सर सोशल मीडिया में यह दावा किया जाता है कि यह मछली कैंसर का कारण बन सकती है, पर आइए समझते हैं कि सच्चाई क्या है, किन कारणों से सावधान रहना जरूरी है, और किन परिस्थितियों में यह हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है।
◽Walking Catfish क्या है और यह खतरनाक क्यों मानी जाती है?
Walking Catfish एक ऐसी विदेशी मछली है जो पानी के बाहर थोड़ी दूरी तक “चल” सकती है। भारत में यह मछली थाइलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया से लाई गई थी। इसे कई जगह फास्ट-ग्रोथ मछली माना जाता है, यानी इसे बहुत कम समय में ज़्यादा मात्रा में तैयार किया जा सकता है।
◽यह खतरनाक क्यों मानी जाती है?
• विदेशी प्रजाति होने के कारण यह स्थानीय मछलियों को खा जाती है।
• प्रदूषित पानी में भी आसानी से जी लेती है।
• इसके पालन में कई बार हार्मोन इंजेक्शन और अनियंत्रित दवाओं का उपयोग किया जाता है।
• इसी वजह से इसके स्वास्थ्य प्रभावों पर सवाल उठते हैं।
◽क्या Walking Catfish खाने से कैंसर हो सकता है?
यह बात वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुई है कि सिर्फ Walking Catfish खाने से ही कैंसर होता है। लेकिन इसके साथ जुड़े कुछ जोखिम ऐसे हैं, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं:
(A) हार्मोन इंजेक्शन का जोखिम
कई जगहों पर इन मछलियों को जल्दी बड़ा करने के लिए स्टेरॉयड, ग्रोथ हार्मोन, और सेक्स-हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं। लंबे समय तक इन हार्मोन-युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हॉर्मोनल असंतुलन, ट्यूमर का जोखिम, इम्यून सिस्टम पर प्रभाव जैसी समस्याएँ बढ़ा सकता है।
(B) प्रदूषित पानी और टॉक्सिन्स
Walking Catfish अक्सर नाले, गंदे तालाब,
या रासायनिक कचरे वाले पानी में भी आराम से जीवित रह लेती है।
ऐसे पानी में भारी धातुएँ (Heavy Metals) मिल सकती हैं:
लेड, आर्सेनिक, पारा (Mercury) इन टॉक्सिन्स का लंबे समय तक सेवन कैंसरकारी प्रभाव डाल सकता है।
(C) एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग
अवैध पालन में इन मछलियों को बार-बार एंटीबायोटिक दिए जाते हैं। इससे खतरा:
• एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस
• लीवर पर भार
• कोशिकाओं में हानिकारक बदलाव
• यह सब समय के साथ कैंसर की आशंका को बढ़ाता है।
( मछली स्वयं कैंसरकारी नहीं, लेकिन उसके पालन की गलत विधियाँ स्वास्थ्य जोखिम को जन्म देती हैं।)
◽Walking Catfish और देशी Magur में क्या अंतर है?
• बहुत लोग गलती से विदेशी Thai Magur को देशी Magur समझकर खा लेते हैं।
• देशी मैगुर (Clarias dussumieri)
(1) आयुर्वेद में औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध
(2) प्राकृतिक रूप से सुरक्षित
(3) हार्मोन रहित
(4) शरीर को प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन्स प्रदान करती है
• विदेशी Walking Catfish / Thai Magur (Clarias batrachus)
(1) तेज़ी से बढ़ने वाली मछली
(2) पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है
(3) कई राज्यों में पालन पर प्रतिबंध
(4) पालन में अक्सर हार्मोन और एंटीबायोटिक उपयोग होता है
इसलिए सावधानी बेहद ज़रूरी है।
◽किन कारणों से सरकार ने Thai Magur पर रोक लगाई?
भारत के कई राज्यों में इस विदेशी कैटफिश को पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान, स्थानीय मछलियों के खत्म होने, तेज़ प्रजनन,
गंदे पानी में जीवित रहने के कारण प्रतिबंधित किया गया।
साथ ही, इसके समर्थन में लोगों द्वारा कथित हार्मोन इंजेक्शन के उपयोग से स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका बढ़ गई थी।
◽Walking Catfish को पहचानने के उपाय
बाज़ार में अगर आप मछली खरीदते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें:
• देशी मैगुर
(1) रंग धूसर और हल्का भूरा
(2) शरीर पतला
(3) सिर छोटा
(4) पंख छोटे
• विदेशी Walking Catfish
(1) गहरा काला या बहुत चमकदार
(2) शरीर चौड़ा और मोटा
(3) सिर चौड़ा और फ्लैट
(4) पंख बड़े और फैलावदार
⚠️ संदेह होने पर न खरीदें।
◽सुरक्षित रूप से मछली खाने के सुझाव
• केवल स्थानीय देशी मछली खरीदें।
• प्रमाणित पोल्ट्री/फिशरी से ही मछली लें।
• चमकदार काली, असामान्य मोटी या सस्ती मछली से बचें।
• साफ-सुथरे और ताजे पानी की मछली चुनें।
• अगर गंध असामान्य हो तो बिल्कुल न खाएँ।
◽ क्या Walking Catfish का सेवन पूरी तरह बंद करना चाहिए?
यदि यह देशी मैगुर नहीं है, यदि यह अवैध तरीके से पाली गई है, या यदि इसकी स्वच्छता संदिग्ध है, तो इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। आप कुल मिलाकर सुरक्षित रहने के लिए देशी मैगुर या स्थानीय मछलियों को ही प्राथमिकता दें।